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Monday, March 23, 2015

ग़ज़ल 07

फिरेंगे दर बदर सोचा नहीं था।।
मैं निकला था अकेले ही सफ़र पर।
मिलेगा हमसफ़र सोचा नहीं था।।
न उसने कद्र की माँ बाप तक की।
गिरेगा इस कदर सोचा नहीं था।।
पता था उम्र काट जायेगी तुझ बिन।
कटेगी यूँ मगर सोचा नहीं था।।
अता करके मुझे वो अपनी रहमत।
करेगा मोतबर सोचा नहीं था।।
'असर' यूँ छोड़ देगा राह में तू।
कभी ए राहबर सोचा नहीं था।।
प्रमोद शर्मा 'असर'
नई दिल्ली, भारत 

Wednesday, September 24, 2014

ग़ज़ल 06

जो सहीफ़ों* का लिखा हो जाएगा ।
तो ज़माने का भला हो जाएगा ।।
साथ देगा जब किसी छोटे का तू ।
बस उसी दम तू बड़ा हो जाएगा ।।
ये नहीं सोचा था कल मैंने कि तू ।
बे सबब मुझसे जुदा हो जाएगा ।।
बात तो कुछ भी न थी बे बात ही ।
मुझसे तू इतना ख़फ़ा हो जाएगा ।।
दौरे – गर्दिश मे मुझे मालूम है ।
यार तू भी बे वफ़ा हो जाएगा ।।
तेरी रहमत जो रही तो वक़्त का ।
हर निशाना फिर ख़ता हो जाएगा ।।
सच कहा तो मार ही देगा न तू ।
और इसके सिवा हो जाएगा ।।
कर भला तू काम कोई भी असर ।
तेरे हक़ मे वो दुआ हो जाएगा ।।

*सहीफ़ों – धर्म ग्रंथों

© प्रमोद शर्मा ‘असर’
हौज़ खास, नई दिल्ली